23 सितंबर, नई दिल्ली। कोई भी सर्व सत्तावादी जिस चीज़ से सबसे ज़्यादा डरता है वह है व्यंग्य। वह व्यंग्य को बर्दाश्त नहीं कर पाता यहां तक कि कार्टून को बर्दाश्त नहीं कर पाता। ऐसे में व्यंग्य लिखना भारी जोखिम का काम है और वह मुकेश कुमार ने किया है। ये उनका दुस्साहस है कि उन्होंने फेक एनकाउंटर लिखा। ये विचार जाने-माने कथाकार एवं कवि उदयप्रकाश UDAY Prakash ने डॉ. मुकेश कुमार की किताब फेक एनकाउंटर के लोकार्पण के अवसर पर कही। लोकार्पण दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के सभागार में हुआ। कार्यक्रम में साहित्य एवं पत्रकारिता के अलावा अन्य क्षेत्रों के सौ से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे उदयप्रकाश ने कहा, “ मैंने इस किताब को पढ़ा है और मैं ये कह सकता हूँ कि ये एक ऐसी किताब है जिसे शुरू करने के बाद रखना मुश्किल हो जाता है। मुकेश कुमार ने कभी भी सामाजिक सरोकारों को छोड़ा नहीं और वह प्रतिबद्धता फ़ेक एनकाउंटर में भी देखी जा सकती है।“
उदयप्रकाश ने किताब की खूबियों पर रोशनी डालते हुए कहा कि सभी फ़ेक एनकाउंटर बहुत चित्रात्मक हैं, विजुअल हैं और इसका नाट्य रूपांतर करके कोई टेलीविज़न शो किया जाए तो वह चैनलों पर चलने वाले कई व्यंग्यात्मक कार्यक्रमों से बेहतर होगा, वह अद्भुत होगा और उसे बनाया जाना चाहिए।
इससे पहले कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ओम थानवी Om Thanvi ने मौजूदा समय की चुनौतियों, बढ़ती असहिष्णुता सत्ताधारियों के चरित्र का ज़िक्र करते हुए कहा कि मुकेश जी के सौम्य व्यक्तित्व की झलक इस किताब की भाषा और उनके कहने के अंदाज़ में भी है। शोर-शराबे के इस दौर में मुकेश ऐसा कर रहे हैं ये अच्छी बात है। उन्होंने कहा कि फ़ेक एनकांउटर में काल्पनिक इंटरव्यू के ज़रिए उन्होंने मौजूदा दौर का खाक़ा खींचा है और कहना होगा कि उनकी रेंज बहुत बड़ी है। उन्होंने ओबामा से लेकर मोदी तक सबके साथ एनकाउंटर किया है और साथ ही साथ पत्रकारों की स्थिति को भी उजागर किया है। थानवी ने कहा कि ये बहुत ख़तरनाक़ दौर है और इस किताब के बहाने उस दौर की भी चर्चा की जानी चाहिए, उसे भी जाँचा-परखा जाना चाहिए।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता की हैसियत से हिस्सा ले रहे वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक प्रियदर्शन ने कहा कि वे फ़ेक एनकाउंटर लगातार पढ़ते रहे हैं और उसे एक किताब के रूप में पढ़ना उनके लिए एक नया अनुभव था। उन्होंने कहा कि किताब में संकलित फर्ज़ी एनकाउंटर झूठ को बेनकाब करते हैं। मुकेश जी ने व्यंग्य के शिल्प को बहुत करीने से साधा है और वह पारंपरिक शिल्प नहीं है। हम लोग व्यंग्य की जिस परंपरा की बात करते हैं ये उनसे हटकर हैं। वे पत्रकारिता के भीतर इंटरव्यू के मार्फ़त उन स्थितियों को ऐसे रख देते हैं जो अपने ढंग से विडंबनामूलक हैं और हम उन्हें व्यंग्य की तरह पढ़ने लगते हैं। मुझे अंदेशा था कि कहीं पूरी की पूरी किताब उसी वैचारिक लाइन पर न हो जिसके लिए लेखकों को बदनाम कर दिया गया है। मैंने पाया कि ये शिथिलता बिल्कुल भी नहीं है और इसमें सारे पक्ष आ गए हैं। ये शिकायत कोई नहीं कर सकता कि ये किताब किसी एक विचारधारा की ओर झुकी हुई है।
प्रियदर्शन ने किताब की विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि मुकेशजी शिल्प के स्तर पर भी प्रयोग कर रहे हैं.। उन्होंने कार्टून और कैरीकेचर की विधा का भी इसमें इस्तेमाल किया है। वे अपने पर भी चुटकी लेने से परहेज़ नहीं करते। उन्होंने कहा कि किताब पर तात्कालिकता बहुत हावी है और इसलिए मैं पाता हूं कि दस-पंद्रह साल बाद कोई पढ़ेगा तो उसे आज के चरित्रों के बारे में कितना पता होगा। मुकेश जी को तात्कालिकता से आगे जाने की ज़रूरत है। इस सबके बावजूद इसे लगातार पढ़ने की होती है और इसे कहीं से भी पढ़ा जा सकता है।
किताब के लेखक डॉ. मुकेश कुमार ने कहा कि हम एक फ़ेक समय में रह रहे हैं। इस समय मे सब कुछ फ़ेक है। मीडिया तो फ़ेक है ही, फ़ेक राष्ट्रवाद है, फ़ेक दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक प्रेम है। उन्होंने कहा कि नेता राजनीति फ़ेक है और इस वजह से लोकतंत्र भी फ़ेक लगने लगा है। इस फ़ेक को काटने के लिए उन्होंने इन फर्जी एनकाउंटर का सहारा लिया और उन्हें खुशी है कि इन्हें देश भर में खूब पढ़ा और सराहा गया।
सुपरिचित कवयित्री एवं शिवना प्रकाशन की निदेशक पारुल सिंह Parul Singh ने किताब का परिचय देते हुए कहा कि फेक एनकाउंटर अनूठा व्यंग्य संग्रह है और व्यंग्य पत्रकारिता की पहली पुस्तक है। ये व्यंग्य संग्रह पहले बनाए गए दायरों को तोड़कर आगे निकल जाता है। मुकेश कुमार ने बहुत सारे नए प्रयोग किए हैं और इसलिए भी साहित्य एवं पत्रकारिता जगत में इसकी चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने मुकेश कुमार इसके लिए आभार व्यक्त किया कि उन्होंने ये व्यंग्य संग्रह प्रकाशन के लिए शिवना प्रकाशन को दिया।
लोकार्पण समारोह की एक बड़ी विशेषता जानी मानी टीवी ऐंकर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी Arfa Khanum का संचालन रहा। अपने टीवी कार्यक्रमों की ही तरहअपने सधे हुए संचालन के ज़रिए उन्होंने किताब को मौजूदा संदर्भों, समस्याओं और विवादों से जोड़ते हुए बातचीत को सार्थक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। उन्होंने किताब के कुछ अंश पढ़े और अपनी तीखी एवं चुटीली टिप्पणियों से मीडिया के चरित्र को उजागर किया भी किया।
आरफ़ा ने मुकेश कुमार की ऐंकरिंग की चर्चा करते हुए कहा कि मैं उन्हें बतौर ऐंकर अच्छे से जानती है वह आतंकित कर देने वाली ऐंकरिंग के विपरीत सौम्यता लिए हुए है। यही बात उनकी इस किताब में दिखती है। उन्होंने किताब के कुछ अंशों का पाठ भी किया।
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शिवना प्रकाशन द्वारा प्रकाशित डॉ. मुकेश कुमार Mukesh Kumar के संग्रह फ़ेक एनकाउंटर का प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में हुआ विमोचन
शिवना साहित्यिकी का जुलाई-सितम्बर 2017 अंक
मित्रों, संरक्षक तथा सलाहकार संपादक सुधा ओम ढींगरा Sudha Om Dhingra प्रबंध संपादक नीरज गोस्वामी Neeraj Goswamy , संपादक पंकज सुबीर, कार्यकारी संपादक- शहरयार Shaharyar तथा सह संपादक पारुल सिंह Parul Singh के संपादन में शिवना साहित्यिकी का जुलाई-सितम्बर 2017 अंक अब ऑनलाइन उपलब्धl है। इस अंक में शामिल है संपादकीय, शहरयार Shaharyar । व्यंग्य चित्र -काजल कुमार Kajal Kumar । आवरण कविता - शमशेर बहादुर सिंह, आवरण चित्र के बारे में....- विस्मय / पल्लवी त्रिवेदी Pallavi Trivedi , उपन्यास अंश- पागलखाना / डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी Gyan Chaturvedi , संस्मरण आख्यान- होता है शबोरोज़ तमाशा मिरे आगे, सुशील सिद्धार्थ Sushil Siddharth , कथा-एकाग्र- नीलाक्षी फुकन Nilakshi Phukan कहानी विखंडन Ajay Navaria , अनीता सक्सेना Anita Saxena कहानी Mehrunnisa Parvez , पुस्तक चर्चा- हँसी की चीखें / कांता राय Kanta Roy Santosh Supekar , एक वह कोना / गोविंद भारद्वाज Govind Bhardwaj Govind Sharma , पहाड़ पर धूप / यादवेंद्र शर्मा Murari Sharma , फिल्म समीक्षा के बहाने- हिन्दी मीडियम, माम, वीरेन्द्र जैन Virendra Jain , बातें-मुलाक़ातें- कृष्णा अग्निहोत्री Krishna Agnihotri , ज्योति जैन Jyoti Jain , रंगमंच- आर्यभट्ट और नाटक ‘अन्वेषक’, प्रज्ञा Pragya Rohini , पेपर से पर्दे तक- कृष्णकांत पंड्या Krishna Kant Pandya, पुस्तक-आलोचन- यादों के गलियारे से / कैलाश मण्डलेकर Kailash Mandlekar , समीक्षा, वंदना गुप्ता Vandana Gupta Maitreyi Pushpa / वो सफ़र था कि मुकाम था, शिखा वार्ष्णेय Shikha Varshney Aruna Sabharwal / उडारी, डॉ. ज्योति गोगिया @jyoti gogiya Sudha Om Dhingra / धूप से रूठी चाँदनी, योगिता यादव Yogita Yadav Shashi Padha / लौट आया मधुमास, शरद सिंह Sharad Singh@manohar agnani / अंदर का स्कूल, तरही मुशायरा Digamber Naswa Nusrat Mehdi @mahesh khalish Saurabh Pandey Nirmal Sidhu Girish Pankaj Tilak Raj Kapoor @sudhir tyagi @vasudeo agrwal Rakesh Khandelwal , आवरण चित्र- पल्लवी त्रिवेदी Pallavi trivedi photography photography - डिज़ायनिंग-सनी गोस्वामी Sunny Goswami । आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्करण भी समय पर आपके हाथों में होगा।
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शिवना साहित्यिकी का अप्रैल-जून 2017 अंक अब ऑनलाइन उपलब्धl है।
मित्रों, संरक्षक तथा सलाहकार संपादक सुधा ओम ढींगरा Sudha Om Dhingra, प्रबंध संपादक नीरज गोस्वामी Neeraj Goswamy , संपादक पंकज सुबीर Pankaj Subeer , कार्यकारी संपादक- शहरयार Shaharyar तथा सह संपादक पारुल सिंह Parul Singh के संपादन में शिवना साहित्यिकी का अप्रैल-जून 2017 अंक अब ऑनलाइन उपलब्धl है। इस अंक में शामिल है संपादकीय, शहरयार। व्यंग्य चित्र -काजल कुमार Kajal Kumar । कविताएँ- तनवीर अंजुम Tanveer Anjum , वंदना मिश्र , जया जादवानी Jaya Jadwani । शख़्सियत - होता है शबोरोज़ तमाशा मिरे आगे, सुशील सिद्धार्थ Sushil Siddharth । कहानी- नीला.....नहीं शीला आकाश, अमिय बिन्दु Amiya Bindu । फिल्म समीक्षा के बहाने- जौली एलएलबी, वीरेन्द्र जैन Virendra Jain। आवरण चित्र के बारे में....- गेंद वाला फोटो / पल्लवी त्रिवेदी Pallavi Trivedi । ख़बर कथा एक थी सोफिया और बिखरे सपने , ब्रजेश राजपूत Brajesh Rajput । पुस्तक-आलोचना- उजली मुस्कुराहटों के बीच / डॉ. शिवानी गुप्ता विमलेश त्रिपाठी । पुस्तकें इन दिनों.... - छल / अचला नागर Achala Nagar , पकी जेठ का गुलमोहर / भगवान दास मोरवाल भगवानदास मोरवाल , भ्रष्टाचार के सैनिक / प्रेम जनमेजय । कथा-एकाग्र- शकील अहमद। समीक्षा- डॉ. सुशील त्रिवेदी / जलतरंग, माधुरी छेड़ा / गीली मिट्टी के रूपाकार। एक कहानी, एक पत्र.... Prem Bhardwaj सुधा ओम ढींगरा। पड़ताल नया मीडिया : नया विश्व, नया परिवेश, डॉ. राकेश कुमार Rakesh Kumar । तरही मुशायरा ( Nusrat MehdiRajni Malhotra Nayyar Rakesh Khandelwal Bhuwan Nistej Nirmal Sidhu धर्मेन्द्र कुमार सिंह Digamber Naswa @gurpreet singh @nakul gautam Dwijendra Dwij Girish Pankaj @anshul tiwari Pawan Kumar Ias Neeraj Goswamy Tilak Raj Kapoor @anita tahzeeb @ Saurabh Pandey Parul Singh @mustafa mahir Ashwini Ramesh Mansoor Ali Hashmi Pankaj Subeer @sudheer tyagi Madhu Bhushan Sharma । आवरण चित्र- पल्लवी त्रिवेदी Pallavi Trivedi - डिज़ायनिंग-सनी गोस्वामी Sunny Goswami
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शिवना साहित्यिकी का जनवरी-मार्च 2017 अंक
मित्रों, संरक्षक तथा सलाहकार संपादक सुधा ओम ढींगरा Sudha Om Dhingra, प्रबंध संपादक नीरज गोस्वामी Neeraj Goswamy , संपादक पंकज सुबीर तथा सह संपादक पारुल सिंह Parul Singh के संपादन में शिवना साहित्यिकी का जनवरी-मार्च 2017 अंक अब ऑनलाइन उपलब्धl है। इस अंक में शामिल है :- आवरण चित्र पल्लवी त्रिवेदी Pallavi Trivedi, आवरण कविता / लालित्य ललित Lalitya Lalit संपादकीय शहरयार Shaharyar व्यंग्य चित्र / काजल कुमार Kajal Kumar संस्मरण नासिरा शर्मा Nasera Sharma (सौजन्य गीताश्री Geeta Shree) कविताएँ, कुछ कविताएँ सरहद पार से.. ज़ेबा अल्वी । कहानी दिलों की एक आवाज़ ऊपर उठती हुई ... मुकेश वर्मा Mukesh Verma आलोचना राकेश बिहारी Ravi Buley की कहानी पर । फिल्म समीक्षा के बहाने, दंगल, वीरेन्द्र जैन Virendra Jain पुस्तक-आलोचना, सत्कथा कही नहीं जाती, क्यों?, संतोष चौबे Santosh Choubey डायरी, धरमिंदर पाजी दा जवाब नहीं, नीरज गोस्वामी Neeraj Goswamy पेपर से पर्दे तक..., कृष्णकांत पंड्या Krishna Kant Pandya यात्रा-वृत्तांत, अंडमान निकोबार द्वीप, संतोष श्रीवास्तव Santosh Srivastava, समीक्षा, महेश दर्पण Mahesh Darpan / डेक पर अँधेरा / हीरालाल नागर Hiralal Nagar , सरिता शर्मा / पृथ्वी को हमने जड़ें दीं / नीलोत्पल Neelotpal Ujjain , जया जादवानी Jaya Jadwani / नक़्क़ाशीदार केबिनेट/ सुधा ओम ढींगरा Sudha Om Dhingra , हृदेश सिंह/ वाबस्ता / पवन कुमार Pawan Kumar Ias , महत्त्वपूर्ण पुस्तकें, तीन विधाएँ, तीन लेखक, तीन पुस्तकें / लता सुरगाथा- यतीन्द्र मिश्र Yatindra Mishra , हाशिये का राग- सुशील सिद्धार्थ Sushil Siddharth , चांद डिनर पर बैठा है- स्वप्निल तिवारी Swapnil Tiwari पड़ताल- शिवना पुस्तक विमोचन समारोह Partap Sehgal प्रेम जनमेजय Sushil Siddharth Pragya Rohini Jyoti Jain Suryakant Nagar Nirmla Kapila Neeraj Goswamy Parul Singh Sudha Om Dhingra , तरही मुशायरा Nusrat Mehdi Neeraj Goswamy Tilak Raj Kapoor Ismat Zaidi Shifa Saurabh Pandey गिरीश पंकज kumar Prjapati धर्मेन्द्र कुमार सिंह Digamber Naswa naveen chaturvedi Devi Nangrani Sanjay Dani Ashwini Ramesh Pooja Bhatia sandhya rathore prasad dinesh kumar anshul tiwari नकुल गौतम Pankaj Subeer डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी Sunny Goswami आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्करण भी समय पर आपके हाथों में होगा।
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http://www.slideshare.net/shivnaprakashan/shivna-sahityiki-january-march-2017
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पंकज सुबीर के चर्चित उपन्यास "अकाल में उत्सव" की आकाशवाणी के इन्द्रप्रस्थ चैनल से प्रकाशित समीक्षा। समीक्षक हैं सुप्रस्द्धि कहानीकार, समीक्षक तथा आलोचक डॉ. प्रज्ञा।
"शिवना साहित्यिकी" का अक्टूबर-दिसम्बर अंक
शिवना प्रकाशन की त्रैमासिक पत्रिका "शिवना साहित्यिकी" का अक्टूबर-दिसम्बर अंक अब ऑनलाइन उपलब्ध है। अंक में शामिल हैं
आवरण कविता तथा अवरण चित्र / पल्लवी त्रिवेदी Pallavi Trivedi , संपादकीय Shaharyar , व्यंग्य चित्र / काजल कुमार Kajal Kumar , शख़्सियत (मलका नसीम) डॉ. विजय बहादुर सिंह Vijay Bahadur Singh , कविताएँ - कुछ नज़्में / राजेश मिश्रा @raj , दो कविताएँ / रोज़लीन , कहानी- सेंसलेस / महेश शर्मा Mahesh Sharma , आलोचना- राकेश बिहारी (तरुण भटनागर Tarun Bhatnagar की कहानी पर एकाग्र) , फिल्म समीक्षा के बहाने - पिंक / वीरेन्द्र जैन Virendra Jain , डायरी- कृष्णा अग्निहोत्री Krishna Agnihotri , ग़ज़ल - इस्मत ज़ैदी Ismat Zaidi Shifa ‘शिफ़ा’, ख़बर-कथा - हेलो कौन भावना दीदी / समीर यादव Sameer Yadav , पेपर से पर्दे तक... / कृष्णकांत पंड्या Krishna Kant Pandya , समीक्षा- पाँच विधाएँ - पंच कन्याएँ ( Neelesh Raghuwanshi, Pragya Rohini, Pallavi Trivedi, Joyshree Roy, angha joglekar) सौरभ पाण्डेय Saurabh Pandey / निकला न दिग्विजय को सिकंदर Zaheer Qureshi , दिविक रमेश Divik Ramesh / शुक्रगुज़ार हूँ दिल्ली Santosh Shreyaans , अमृतलाल मदान Amrit Lal Madan / छुअन Nijhawan Vikesh तथा अन्य कहानियाँ , महेश कटारे Mahesh Katare / उत्तरायण @sudershan Priydarshini , पड़ताल- बाल-रंगमंच : सम्भावनाएँ और चुनौतियाँ / डॉ. प्रज्ञा Pragya Rohini, डिज़ाइन Sunny Goswami
संरक्षक तथा प्रधान संपादक Sudha Om Dhingra, प्रबंध संपादक Neeraj Goswamy, संपादक Pankaj Subeer, सह संपादक Parul Singh, कार्यकारी संपादक Shaharyar
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'शिवना साहित्यिकी' का जुलाई-सितम्बर 2016 अंक अब ऑनलाइन उपलब्ध है
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इस अंक में शामिल रचनाकार हैं : आवरण चित्र कविता Veeru Sonker, व्यंग्य चित्र Kajal Kumar, कविताएं Ashok Kumar Pandey, कहानी : 'टच मी नॉट' Geeta Shree, अालोचना - राकेश बिहारी द्वारा Akanksha Pare की कहानी 'शिफ्ट+कंट्रोल+ऑल्ट=डिलीट' पर एकाग्र आलेख, गौतम राजरिशी द्वारा Pankaj Mitra की कहानी 'इवेंट मैनेजर' पर एकाग्र आलेख, Pallavi Trivedi की डायरी 'कोहरा-कोहरा हुआ मन- एक सर्द दिन की डायरी', Rajshree Mishra की ख़बर कथा 'मेरा सच', 'फिल्मी दुनिया से' स्तंभ 'सिनेमा - एक कला और तकनीक' Krishna Kant Pandya, Pragya Rohini के कहानी संग्रह 'तक्सीम' पर वेदप्रकाश सिंह की समीक्षा, विमलेश त्रिपाठी के उपन्यास 'कैनवास पर प्रेम' पर GangaprasadSharma Gunshekhar की समीक्षा, Brajesh Rajput की पुस्तक 'चुनाव, राजनीति और रिपोर्टिंग' पर सुशील कुमार शर्मा की समीक्षा। Sudha Om Dhingra के उपन्यास 'नक़्क़ाशीदार केबिनेट' पर Ajay Navaria की पुस्तक चर्चा। लोकेश कुमार सिंह 'साहिल' की ग़ज़लें । आवरण चित्र - Pallavi trivedi photography, डिज़ायनिंग - Sunny Goswami
संपादक मंडल - सलाहकार संपादक Sudha Om Dhingra, प्रबंध संपादक Neeraj Goswamy, कार्यकारी संपादक Shaharyar, सह संपादक Parul Singh
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संपादक
शिवना प्रकाशन द्वारा शाम आयोजित पुण्य स्मरण संध्या
शिवना प्रकाशन द्वारा शाम आयोजित पुण्य स्मरण संध्या में स्व. जनार्दन शर्मा, स्व. नारायण कासट, स्व. अबादत्त भारतीय, स्व. ऋषभ गांधी, स्व. कैलाश गुरू स्वामी, स्व. कृष्ण हरि पचौरी, स्व. मोहन राय तथा स्व. रमेश हठीला को काव्यांजलि अर्पित की गई। इस पुण्य स्मरण संध्या में स्व. बाबा अबादत्त भारतीय स्मृति शिवना सम्मान श्रीमती स्वाति तिवारी को, जनार्दन शर्मा स्मृति शिवना सम्मान श्री म्मोहन सगोरिया को, स्व. रमेश हठीला शिवना सम्मान शायरा श्रीमती इस्मत ज़ैदी को तथा स्व. मोहन राय स्मृति शिवना समान श्री रियाज़ मोहाद रियाज़ को प्रदान किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी की सचिव श्रीमती नुसरत मेहदी ने की जबकि मुख्य अतिथि के रूप में नगरपालिका अध्यक्ष श्री नरेश मेवाड़ा तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में इछावर के विधायक श्री शैलेन्द्र पटेल उपस्थित थे।
दीप प्रज्जवलन तथा दिवंगत साहित्यकारों, पत्रकारों को अतिथियों द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। बी बी एस क्लब की ओर से वसंत दासवानी ने पुष्प गुच्छ भेंट कर सभी अतिथियों का स्वागत किया। तत्पश्चात शिवना प्रकाशन द्वारा साहित्यकारों को समानित किया गया। अतिथियों ने स्व. बाबा अबादत्त भारतीय स्मृति शिवना सम्मान जानी मानी कथाकारा श्रीमती स्वाति तिवारी को, जनार्दन शर्मा स्मृति शिवना सम्मान सुप्रसिद्ध कवि श्री मोहन सगोरिया को, स्व. रमेश हठीला शिवना सम्मान वरिष्ठ शायरा श्रीमती इस्मत ज़ैदी को तथा स्व. मोहन राय स्मृति शिवना सम्मान सीहोर के ही वरिष्ठ शायर श्री रियाज़ मोहाद रियाज़ को प्रदान किया गया। सभी को शॉल श्रीफल समान पत्र तथा पुष्प गुच्छ भेंट कर ये समान प्रदान किये गये। इस अवसर पर शिवना प्रकाशन की आठ पुस्तकों, मुकेश दुबे के तीन उपन्यासों ‘क़तरा-क़तरा ज़िंदगी’, ‘रंग ज़िंदगी के’ तथा ‘कड़ी धूप का सफ़र’, नुसरत मेहदी के उर्दू ग़ज़ल संग्रह ‘घर आने को है’, अमेरिका की कवयित्री सुधा ओम ढींगरा के काव्य संग्रह ‘सरकती परछाइयाँ’, पूर्व पुलिस महानिरीक्षक श्री आनंद पचौरी के काव्य संग्रह ‘चलो लौट चलें’ तथा मुबई की कवयित्री मधु अरोड़ा के काव्य संग्रह ‘तितलियों को उड़ते देखा है’, हिन्दी चेतना ग्रंथमाला ‘नई सदी का कथा समय’ का विमोचन किया गया। समान समारोह के पश्चात कवि समेलन में समानित तथा आमंत्रित कवियों ने अपनी प्रतिनिधि रचनाओं का पाठ किया। स्वाति तिवारी, मोहन सगोरिया, इस्मत ज़ैदी, नुसरत मेहदी, तिलकराज कपूर, रियाज़ मोहमद रियाज़, मुकेश दुबे, गौतम राजरिशी, हरिवल्लभ शर्मा तथा वंदना अवस्थी दुबे ने अपनी प्रतिनिधि रचनाओं का पाठ कर दिवंगत साहित्यकारों को काव्यांजलि प्रदान की। कार्यक्रम में बड़ी संया में शहर के सुधि श्रोता, पत्रकार एवं प्रबुद्ध जन उपस्थित थे। अंत में आभार शैलेश तिवारी ने व्यक्त किया।
डॉ. सुधा ओम ढींगरा के कविता संग्रह सरकती परछाइयां का विमोचन
कथाकार कवयित्री सुधा ओम ढींगरा के शिवना प्रकाशन द्वारा प्रकाशित कविता संग्रह सरकती परछाइयां का विमोचन हिन्दी चेतना अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में स्कारबरो सिविक सेण्टर, ओण्टेरियो कैनेडा में हुआ। वरिष्ठ कथाकार श्री महेश कटारे, प्रवासी कथाकारा डॉ.सुदर्शन प्रियदर्शिनी, श्री जो ली (काउन्सलर- मार्ख़म), भारत के काउन्सलेट जनरल श्री अखिलेश मिश्रा, हिन्दी चेतना के मुख्य सम्पादक श्री श्याम त्रिपाठी ने सकरती परछाइयां का विमोचन किया। पुस्तक तथा लेखिका का परिचय कहानीकार पंकज सुबीर ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर बोलते हुए डॉ सुधा ओम ढींगरा ने कहा कि इस संग्रह की कविताएं कुछ अलग तरह की कविताएं हैं तथा आशा है कि पाठक इन कविताओं को पसंद करेंगे। उन्होंने कहा कि कविता लिखना उनके लिए अपने आप से ही पहचान करने का एक जरिया रहा है। कविताएं अपने आप से संवाद स्थापित करने का तरीका है। पिछला कविता संग्रह धूप से रूठी चांदनी जिस प्रकार पाठकों ने पसंद किया था उसी से उत्साहित होकर इस संग्रह की भूमिका बनी। विमोचन के अवसर पर एक कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया । वरिष्ठ साहित्यकार रामेश्वर काम्बोज हिमांशु की अध्यक्षता में आयोजित कवि सम्मेलन में सुदर्शन प्रियदर्शिनी, पंकज सुबीर, अभिनव शुक्ल, धर्मपाल जैन, राज माहेश्वरी, शैलजा सक्सेना, शैल शर्मा, दीप्ति कुमार, सुधा ओम ढींगरा तथा श्याम त्रिपाठी ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। कवि सम्मेलन का संचालन अभिनव शुक्ल ने किया । इस अवसर पर बड़ी संख्या में हिन्दी प्रेमी और साहित्यकार उपस्थित थे ।
सरकती परछाइयां ( कविता संग्रह) डॉ. सुधा ओम ढींगरा
पृष्ठ 120, मूल्य 150 रुपये, वर्ष 2014
पुस्तक प्राप्त करने के लिए लिखें
शिवना प्रकाशन, पी. सी. लैब, सम्राट कॉम्प्लैक्स बेसमेंट, बस स्टैंड के सामने, सीहोर 466001] मध्यप्रदेश, दूरभाष +91-7562405545, +91-7562695918 मेल shivna.prakashan@gmail.com
हमको भी बहुत कुछ सीखने को मिलेगा ब्रजेश राजपूत की इस पुस्तक से : शिवराज सिंह चौहान शिवना प्रकाशन के आयोजन में पत्रकार ब्रजेश राजपूत की पुस्तक का विमोचन मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने किया
चुनाव हो जाने के बाद चुनावों के बारे में पढ़ना रोचक भी होता है और ज्ञान वर्द्धक भी । दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र हमारा देश है जहां इतने आराम से सत्ता परिवर्तन हो जाते हैं जिस पर दुनिया चकित रह जाती है। मैंने पुस्तक को देखा है और उसमें कई कई ऐसी बातें भी हैं जिन्हें हम भी चुनाव के बाद भूल जाते हैं ।
चुनाव के दौरान जनता, नेता और कार्यकर्ता क्या क्या करते हैं इस पर ब्रजेश राजपूत ने बहुत सुंदर तरीके से लिखा है। यह एक जरूरी पुस्तक है हमको भी बहुत कुछ सीखने मिलेगा इस पुस्तक से और अपने आप को देखने का भी अवसर मिलेगा । ब्रजेश जी को पुस्तक लिखने हेतु साधुवाद तथा शिवना प्रकाशन को बहुत धन्यवाद जिन्होंने मध्यप्रदेश को जानने के लिये एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक का प्रकाशन किया।
उक्त उद्गार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शिवना प्रकाशन द्वारा आयोजित वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश राजपूत की पुस्तक चुनाव, राजनीति और रिपोर्टिंग के विमोचन समारोह के अवसर पर व्यक्त किये।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप वरिष्ठ पत्रकार श्री गिरजाशंकर एवं मीडिया समीक्षक श्री मुकेश कुमार उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता गलगोतिया विश्वविद्यालय के डीन प्रो. प्रदीप कृष्णात्रै ने की ।
कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत प्रकाशन की ओर से पंकज सुबीर, श्रवण मावई, सनी गोस्वामी तथा शहरयार खान ने किया।
ब्रजेश राजपूत की पुस्तक पर बोलते हुए श्री मुकेश कुमार ने कहा कि ब्रजेश राजपूत ने पुस्तक को जिस प्रकार सारी जानकारियों को समेटते हुए लिखा है वह पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिये बहुत उपयोगी साबित होगी। श्री गिरजाशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि कोई चुनाव लड़ता है कोई लड़वाता है कोई वोट डालता है और कोई इन सबको देखता है लेकिन चुनाव को पढ़ना भी एक अनुभव है और इस किताब में हम चुनाव को पढ़ेंगे। ब्रजेश राजपूत की ये पुस्तक एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक है।
तत्पश्चात अतिथियों ने मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव 2013 पर लिखी गई ब्रजेश राजपूत की पुस्तक का विमोचन किया।
प्रकाशन पंकज सुबीर ने लेखक ब्रजेश राजपूत को प्रकाशन की ओर से सम्मानित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो प्रदीप कृष्णात्रै ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि 2013 के चुनाव पर 2014 में ही पुस्तक आ जाना और इतनी अच्छी पुस्तक का आ जाना एक महत्त्वपूर्ण घटना है। ब्रजेश राजपूत ने बहुत मेहनत से और पूरी रोचकता के साथ पुस्तक को लिखा है।
ब्रजेश राजपूत ने इस अवसर पर बोलते हुए कहा कि टीवी का पत्रकार बहुत अस्त व्यस्त जीवन जीता है, उसके लिये कोई पुस्तक लिख लेना और समय से लिख लेना बहुत मुश्किल होता है। पत्रकार को पता ही नहीं होता कि उसे अगले ही दिन कहाँ जाना है।
मेरे लिये पुस्तक को लिखते समय यही बड़ी चुनौती थी। 2013 के चुनाव बड़े रोचक चुनाव थे, जिस प्रकार प्रचार हुआ पहली बार सोशल मीडिया का व्यापक प्रयोग हुआ उस सबके चलते ही ये पुस्तक लिखने के बारे में मैंने सोचा। आज जब ये पुस्तक आ गई है तो मेरे लिये ये विशेष दिन है, इसलिये भी कि मुख्यमंत्री ने इसके विमोचन के लिये समय दिया।
कार्यकम के अंतिम चरण में मुख्यमंत्री सहित सभी अतिथियों को स्मृति चिह्न के रूप में शिवना प्रकाशन की पुस्तकों का सेट सीहोर के पत्रकार श्रवण मावई ने भेंट किया गया। मुख्यमंत्री ने स्मृति चिह्न के रूप में पुस्तकें देने की विशेष रूप से सराहना की।
कार्यक्रम का संचालन पंकज सुबीर ने किया।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में पत्रकार, साहित्यकार उपस्थित थे।
कार्यक्रम का वीडियो
ब्रजेश राजपूत का पुस्तक को लेकर साक्षात्कार
कार्यक्रम के फोटो
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समाचारों के लिंक
http://bhadas4media.com/print/18931-2014-04-09-10-42-39.html
http://www.insighttvnews.com/newsdetails.php?show=39799
http://hindimedia.in/3/news/Brijesh-Rajput-we-will-learn-much-from-this-book-Shivraj-Singh-Chouhan
http://www.rajkaaj.com/news.php?id=5638&catid=1
http://www.rainbownews.in/region.php?nid=5913
http://www.youtube.com/watch?v=RJdUnfZu_Jo