शिवना प्रकाशन से पुस्तकें प्रकाशन करवाने के लिये कई रचनाकारों द्वारा लगातार संपर्क किया जा रहा है उस हेतु ये आलेख लगाया जा रहा है । यहां पर पुस्तकों के प्रकाशन के संदर्भ में सम्पूर्ण जानकारी दी जा रही है ।
सर्वप्रथम लेखक को अपनी पुस्तक की पांडुलिपि प्रकाशन के लिये भेजनी होती है । जिसे प्रकाशन के विशेषज्ञों का दल देखता है तथा गुणवत्ता के आधार पर प्रकाशन हेतु स्वीकृति प्रदान करता है ।
शिवना प्रकाशन से सहकारिता के आधार पर पुस्तकों का प्रकाशन किया जाता है । शिवना द्वारा उच्च गुणवत्ता के आधार पर पुस्तकों का प्रकाशन किया जाता है । प्रकाशन की प्रक्रिया में पुस्तक की कम्पोजि़ग, डिज़ायनिंग, आवरण आदि शामिल होता है । साथ ही पुस्तक के प्रकाशन के पश्चात उसके विमोचन, प्रचार आदि पर भी प्रकाशन द्वारा कार्य किया जाता है । प्रकाशन द्वारा लगभग 100 से भी अधिक समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, इंटरनेट पत्रिकाओं में पुस्तक की समीक्षा प्रकाशित करवाई जाती है । पुस्तक की समीक्षा विशेषज्ञों द्वारा लिखवाई जाती है । जिसे प्रकाशन के लिये भेजा जाता है । देश भर की सभी प्रमुख पत्र, पत्रिकाओं में शिवना प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तकों की समीक्षा प्रमुखता के साथ प्रकाशित की जाती है । साथ ही विभिन्न पुरस्कारों के लिये भी प्रकाशन द्वारा अपने स्तर पर पुस्तकें भेजी जाती हैं ।
पुस्तक का प्रकाशन 90 जीएसएम के काग़ज़ पर किया जाता है । प्रकाशन के दौरान प्रूफ की तीन बार जांच की जाती है तथा शुद्धता का पूरा ध्यान रखा जाता है । आवरण पृष्ठ हार्ड बाउंड में मल्टीकलर में तैयार किया जाता है जिस पर मेट फिनिश की जाती है । आवरण का डिजायन विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया जाता है ।
शिवना प्रकाशन को अपना ISBN नंबर मिला हुआ है । सभी पुस्तकों पर प्रकाशन का नंबर प्रकाशित किया जाता है ।
104 पेज की 90 जीएसएम पर हार्ड बाइंड मल्टी कलर कवर के साथ जो पुस्तक प्रकाशित की जाती है उस एक पुस्तक का मूल्य 105 रुपये होता है । लेखक को हम 50 पुस्तकें प्रदान करते हैं, साथ ही लेखक को 250 पुस्तके खरीदनी होती हैं अग्रिम, यह लेखक स्वयं भी कर सकता है या फिर किसी संस्था द्वारा भी करवा सकता है । चूंकि पुस्तकों का प्रकाशन सहकारिता के आधार पर । प्रकाशन द्वारा इन पुस्तकों का व्यापक प्रचार प्रसार किया जाता है देश भर की साहित्यिक पत्रिकाओं में समीक्षा आदि प्रकाशित की जाती हैं । प्रथम संस्करण में 600 प्रतियां छापी जाती हैं जिनमें 300 लेखक के पास जाती हैं तथा शेष 300 प्रतियों को प्रकाशन द्वारा विमोचन, प्रचार प्रसार, समीक्षा, लाइब्रेरी, विमोचन आदि में उपयोग किया जाता है । पुस्तक की गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जाता है जिसके कारण भारत ही नहीं भारत के बाहर के भी दस से अधिक लेखकों ने शिवना प्रकाशन से अपनी पुस्तक का प्रकाशन करवाया है ।






0 टिप्पणियाँ:
एक टिप्पणी भेजें