शिवना प्रकाशन के आयोजन में सुदीप शुक्ला, महेंद्र गगन और तिलकराज कपूर सम्मानित हुए, ‘डाली मोगरे की’ (ग़ज़ल संग्रह : नीरज गोस्वामी), ‘मैं भी तो हूँ’ (ग़ज़ल संग्रह: नुसरत मेहदी), ‘वैश्विक रचनाकार कुछ मूलभूत जिज्ञासाएँ’ (साक्षात्‍कार संग्रह : सुधा ओम ढींगरा) का विमोचन

छोटे शहरों में उदासी नहीं उत्साह दिखाई देता है- संतोष चौबे

सीहोर । शिवना प्रकाशन द्वारा सुकवि जनार्दन शर्मा, पत्रकार द्वय स्व. ऋषभ गाँधी तथा स्व. अम्बादत्त भारतीय, साहित्यकार स्व. नारायण कासट, कवि स्व. कृष्ण हरि पचौरी, कवि स्व. रमेश हठीला, गीतकार स्व. मोहन राय तथा शायर स्व. कैलाश गुरूस्वामी की स्मृति में आयोजित पुण्य स्मरण संध्या में पैंतीसवा जनार्दन शर्मा सम्मान प्रतिष्ठित कवि श्री महेंद्र गगन को,  बाबा भारतीय सम्मान वरिष्ठ पत्रकार श्री सुदीप शुक्ला को  तथा रमेश हठीला सम्मान शायर श्री तिलकराज कपूर को प्रदान किया गया।

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स्थानीय ब्ल्यू बर्ड स्कूल के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वनमाली सृजन पीठ के अध्‍यक्ष कहानीकार श्री संतोष चौबे तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में कहानीकार रेखा कस्तवार, साहित्‍य अकादमी मप्र से पधारीं नुसरत मेहदी और इलाहाबाद के कवि सौरभ पाण्डेय उपस्थित थे, अध्यक्षता जयपुर के सुप्रसिद्ध शायर श्री नीरज गोस्वामी ने की। कार्यक्रम के आरंभ में अतिथियों ने दीप प्रज्जवलित कर साहित्यकारों के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की । आयोजन समिति संयोजक बसंत दासवानी, प्रकाश व्यास काका, प्रमोद जोशी गुंजन, ओमदीप, रामनारायण ताम्रकार,  रमेश गोहिया, हरीश अग्रवाल, डा. साधुराम शर्मा,राममूति शर्मा तथा योगेश राठी, धर्मेन्द्र पाटीदार ने किया। ‘बाबा भारतीय सम्मान’ से सम्मानित पत्रकार श्री सुदीप शुक्ला का परिचय पंकज सुबीर ने,  ‘जनार्दन शर्मा सम्मान’ से सम्मानित कवि श्री महेंद्र गगन का परिचय सुप्रसिद्ध कहानीकार श्रीमती रेखा कस्तवार ने तथा ‘रमेश हठीला सम्मान’ से सम्मानित कवि श्री तिलकराज कपूर का परिचय शायर श्री सौरभ पाण्डेय ने दिया। तत्पश्चात तीनों सम्मानित रचनाकारों का सम्मान अतिथियों द्वारा किया गया ।

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इस अवसर पर शिवना प्रकाशन की पुस्तकों ‘डाली मोगरे की’ (ग़ज़ल संग्रह : नीरज गोस्वामी),  ‘मैं भी तो हूँ’ (ग़ज़ल संग्रह: नुसरत मेहदी),  ‘वैश्विक रचनाकार कुछ मूलभूत जिज्ञासाएँ’ (साक्षात्‍कार संग्रह : सुधा ओम ढींगरा) का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया ।

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अतिथियों ने कैनेडा से प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका ‘हिन्दी चेतना’ के नव वर्ष अंक और दिल्ली से प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका ‘दूसरी परम्परा’ का भी लोकार्पण इस अवसर पर किया । मुख्य अतिथि श्री संतोष चौबे ने अपने उदबोधन में  कहा कि इस प्रकार के आयोजन के दूसरे उदाहरण बहुत मुश्किल से मिलेंगे जहां पर शहर इस प्रकार से अपने साहित्यकारों को याद कर रहा है । उन्होंने इस बात को लेकर सराहना की कि पैंतीस सालों से एक आयोजन को अनवरत किया जा रहा है । उन्होंने कहा कि छोटे शहरों में साहित्य का माहौल देखने का मिल रहा है मैं शुरु से कहता रहा हूं कि देश के बड़े साहित्यकारों को छोटे शहरों से संवाद बनाए रखना जरुरी है क्योंकि जो प्रतिभा छोटे शहरों में मिलती है उसमें उदासी नहीं उत्साह दिखाई देता है।

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कार्यक्रम के अगले चरण में सम्‍मानित कवियों श्री महेंद्र गगन, श्री तिलकराज कपूर के साथ अतिथि कवियों श्री नीरज गोस्‍वामी, श्री सौरभ पाण्‍डेय तथा नुसरत मेहदी ने अपनी प्रतिनिधि रचनाओं का पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन कहानीकार पंकज सुबीर ने किया । अंत में आभार व्यक्त करते हुए पत्रकार शैलेश तिवारी ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में के बुद्धिजीवी, कवि, पत्रकार, साहित्यकार तथा श्रोता उपस्थित थे ।
समाचार संकलन : चंद्रकांत दासवानी

काव्यांजलि संध्‍या तथा पुस्‍तक लोकार्पण समारोह

JANARDAN SAMMAN SAMMAN NEWS1 देश में साहित्यिक पुस्तकों की अग्रणी प्रकाशन संस्था शिवना प्रकाशन Shivna Prakashan द्वारा साठोत्तरी हिंदी कविता के यशस्वी कवि पंडित जनार्दन शर्मा की पुण्यतिथि पर हर वर्ष होने वाली पुण्य स्मरण संध्या में वरिष्ठ पत्रकार स्व. अम्बादत्त भारतीय, वरिष्ठ साहित्यकार स्व. नारायण कासट, कवि स्व. कृष्ण हरि पचौरी, सुकवि स्व. रमेश हठीला, गीतकार स्व. मोहन राय तथा वरिष्ठ शायर स्व. कैलाश गुरूस्वामी को काव्यांजलि प्रदान की जाएगी। इस काव्यांजलि समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में वनमाली सृजन पीठ के अध्यक्ष तथा आइसैक्ट यूनिवर्सिटी Aisect university Aisect University के चांसलर, कहानीकार श्री संतोष चौबे उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्‍यक्षता वरिष्‍ठ कवि एवं शायर श्री नीरज गोस्‍वामी करेंगे जबकि विशिष्‍ट अतिथि के स्‍प में वरिष्‍ठ कहानीकार डाॅ रेखा कस्‍तवार Rekha Kastwar तथा वरिष्‍ठ कवि श्री सौरभ पाण्‍डेय Saurabh Pandey उपस्थित रहेंगे । शिवना प्रकाशन द्वारा इस कार्यक्रम में तीन सम्मान प्रदान किये जाएंगे, पैंतीसवे पंडित जनार्दन सम्मान देश के लब्ध प्रतिष्ठित कवि तथा पत्रकार श्री महेंद्र गगन Mahendra Gagan को सम्‍मानित किया जायेगा। श्री गगन भोपाल से प्रकाशित पहले पहल समाचार पत्र के प्रधान सम्पादक भी हैं। वहीं इस वर्ष से प्रदेश भर में सीहोर पत्रकारिता की पहचान रहे स्व. बाबा अम्बादत्त भारतीय की स्मृति में भी एक सम्मान शिवना प्रकाशन द्वारा स्थापित किया जा रहा है। प्रथम बाबा भारतीय सम्मान से प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार श्री सुदीप शुक्ला Sudeep Shukla को सम्‍मानित किया जाएगा। श्री शुक्ला वर्तमान में दैनिक भास्कर भोपाल में रीजनल हैड के रूप में कार्यरत हैं। गीतकार स्व. रमेश हठीला की स्मृति में दिये जाने वाले सम्मान से वरिष्ठ कवि तथा शायर श्री तिलकराज कपूर Tilak Raj Kapoor को सम्‍मानित किया जायेगा। श्री तिलकराज कपूर वर्तमान में जल संसाधन विभाग भोपाल में एडीशनल सेकेट्री के रूप में पदस्थ हैं।
कार्यक्रम में शिवना प्रकाशन द्वारा प्रकाशित डॉ सुधा ओम ढींगरा Sudha Om Dhingra के साक्षात्‍कार संग्रह 'वैश्विक रचनाकार कुछ मूलभूत जिज्ञासाएं' तथा श्री नीरज गोस्‍वामी Neeraj Goswamy के ग़ज़ल संग्रह 'डाली मोगरे की' का लोकार्पण किया जाएगा ।

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कार्यक्रम 19 जनवरी रविवार की शाम ब्‍ल्‍यू बर्ड स्‍कूल सीहोर के सभागर में आयोजित किया जाएगा

डाली मोगरे की, ग़ज़ल संग्रह, नीरज गोस्‍वामी

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डाली मोगरे की

ग़ज़ल संग्रह

नीरज गोस्‍वामी 

‘वैश्विक रचनाकारः कुछ मूलभूत जिज्ञासाएँ’ में मौजूद साक्षात्कार इस विधा की गरिमा को समृद्ध करते हैं -सुशील सिद्धार्थ

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कुछ पत्रकारों और लेखकों ने साक्षात्कार लेने की कला को एक रचनात्मक हुनर बना लिया है। उन्हें पता है कि किस लेखक से बात करने का सलीका क्या है। संवाद एक सलीका ही तो है। साक्षात्कार का सौन्दर्य है संवादधर्मी होना। ...ऐसी अनेक विशेषताएँ सुधा ओम ढींगरा द्वारा लिये गये साक्षात्कारों में सहज रूप से उपलब्ध हैं। ‘वैश्विक रचनाकारः कुछ मूलभूत जिज्ञासाएँ’ में मौजूद साक्षात्कार इस विधा की गरिमा को समृद्ध करते हैं। समर्पित रचनाकार सुधा ओम ढींगरा बातचीत करने में दक्ष हैं। वैसे भी जब वे फोन करती हैं तो अपनी मधुर आवाज़ से वातावरण सरस बना देती हैं। जीवन्तता साक्षात्कार लेने वाले का सबसे बड़ा गुण है। बातचीत को किसी फाइल की तरह निपटा देने से मामला बनता नहीं। सुधा जी को इस विधा में दिलचस्पी है। उन्होंने अनुभव और अध्ययन से इसे विकसित किया है। वे ऐसी लेखक हैं, जिन्हें टेक्नोलॉजी का महत्त्व पता है। बातचीत करने के लिये आमने सामने होने के अतिरिक्त उन्होंने फोन, ऑनलाइन और स्काइप का उपयोग किया है। बल्कि आमना-सामना अत्यल्प है। इससे कई बार औपचारिक या किताबी होने का संकट रहता है जो स्वाभाविक है। ....लेकिन यह देखकर प्रसन्नता होती है कि सारे साक्षात्कार जीवन्त और दिलचस्प हैं।
अमेरिका, कैनेडा, इंग्लैण्ड, आबूधाबी, शारजाह, डेनमार्क और नार्वे के साहित्यकारों से सुधा जी के प्रश्न सतर्क हैं। साहित्यकारों ने भी सटीक उत्तर दिये हैं। यह पुस्तक पाठकों की ज्ञानवृद्धि के साथ उनकी संवेदना का दायरा भी व्यापक करेगी। वैश्विक रचनाशीलता की मानसिकता को यहाँ लक्षित किया जा सकता है। ऐसी पुस्तकें हिन्दी में बहुत कम हैं। शायद न के बराबर। विश्व के अनेक देशों में सक्रिय हिन्दी रचनाकारों के विचार पाठकों तक पहुँचाने के लिए हमें सुधा ओम ढींगरा को धन्यवाद भी देना चाहिए। हिन्दी में कुछ विशेषज्ञ रहे हैं जो साक्षात्कार को रचना बना देते हैं। सुधा जी को देखकर.... उनके काम को पढ़कर और इस विधा के विषय में उनके विचार जानकर उनकी विशेषज्ञता की सराहना की जानी चाहिए।

-सुशील सिद्धार्थ

सम्पादक
राजकमल प्रकाशन
1 बी, नेताजी सुभाष मार्ग
दरियागंज-2
मोबाइल 09868076182

नुसरत मेहदी नये मौसम, नये लम्हों की शायरा -डॉ. बशीर बद्र ( शिवना प्रकाशन की नई पुस्‍तक 'मैं भी तो हूं' ग़ज़ल संग्रह नुसरत मेहदी )

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नुसरत मेहदी नये  मौसम, नये लम्हों की शायरा -डॉ. बशीर बद्र
( शिवना प्रकाशन की नई पुस्‍तक 'मैं भी तो हूं' ग़ज़ल संग्रह नुसरत मेहदी )
शायरी ख़ुदा की देन है । इसका भार हर कोई नहीं सह सकता । यह न शीशा तोड़ने का फ़न है, न फायलातुन रटने का । यह काम बहुत नाज़ुक  है । इसमें जिगर का ख़ून निचोड़ना पड़ता है, तब कहीं कोई शेर बनता है। ग़ज़ल के शेर रोज़ रोज़ नहीं होते-चमकती है कहीं सदियों में आँसुओं से ज़मीं, ग़ज़ल के शेर कहाँ रोज़ रोज़ होते हैं।
हर नामचीन और अमर शाइर (या शाइरात), हज़ारों साल के ग़ज़ल के सफ़र से बिना मेहसूस किए ही सीख हाासिल कर के एक नए व्यक्तित्व का सृजन करता है और यह सीख या शिक्षा उसके चेतन और अवचेतन का हिस्सा बन जाती है । साहित्य के आकाश पर कई सितारे डूबते हैं सैकड़ों उभरते हैं उनमें एक चमकदार और रौशन तारा नुसरत मेहदी हैं । बात करने से पहले उनके चंद शेर देखिए .....
महकने की इजाज़त चाहती है
हसीं चाहत भरे जज़्बों की ख़ुश्बू
फूलों की हवेली पर ख़ुश्बू से ये लिखा है
इक चाँद भी आयेगा दरवाज़ा खुला रखना
खामोशी बेज़बाँ नहीं होती
उम्र भर वह समझ  सका था क्या
किसी एहसास में डूबी हुई शब
सुलगता भीगता आँगन हुई है
मिरे शेरों मिरे नग़्मों की ख़ुश्बू
तुम्हारे नाम इन फूलों की ख़ुश्बू
कोई साया तो मिले उसमें सिमट कर सो लूँ
इतना जागी हूँ कि आँखों  में चुभन होती है
जाने कब छोड़ कर चली जाए
ज़िदंगी का न यूँ भरोसा कर
नुसरत मेहदी  के अश्आर को मैंने दो तीन बैठकों में पढ़ा । हर्फ़-हर्फ़ पढ़ा । मुझे हिंदुस्तान की तमाम ज़िक्र के योग्य शाइरात को पढ़ने और सुनने का अवसर मिला, उनका साहित्यिक मर्तबा इस बात से कम नहीं होता कि आज के सब से मनभावन, भावपूर्ण और सुंदर लहजे के अनगिनत शेर, मुद्दतों बाद नुसरत मेहदी  के कलाम में पाये। यह शेर सीधे दिल और दिमाग़ को प्रभावित करते है और पढ़ने सुनने वाला  एक अलग और नायाब लहजे और शेर के सौंदर्य के नये ग़ज़लिया स्वाद से परिचित होता है....
वहीं पर ज़िंदगी सैराब होगी
जहाँ सूखे हुए तालाब होंगे
तेज़ाबी बारिश के नक़्श नहीं मिटते
मैं अश्कों से आँगन धोती रहती हूँ
जब से गहराई  के ख़तरे भाँप लिए
बस साहिल पर पाँव भिगोती रहती हूँ
एक मुद्दत से इक सितारा-ए-शब
सुब्ह की राह तकता रहता है
तारीकियों में सारे मनाज़िर चले गए
जुग्नू सियाह रात में सच बोलता रहा
शेरों की सादगी और रचावट सादा लहजे में अहम और बड़ी बात कहने का ढंग स्त्रियोचित परिवेश के बावजूद ज़िंदगी की फुर्ती चुस्ती और कर्म की राह की मुसीबतों  से न घबराना । तेज़ाबी बारिशों, सूखे हुए तालाबों  से ज़िंदगी की प्यास बुझाना, गहराई  के खतरे को भाँपने  के बावजूद किनारे पर क़दमों के निशाँ, काली रात में जुगनुओं का सच, अंधेरी और अंतहीन रातों में  उम्मीद का चमचचमाता तारा, नुसरत मेहदी की ज़िंदगी  से मोहब्बत, सच्चाई की तरफ़दारी और नाइंसाफ़ी  से लड़ने का इशारा है। यह सीधा सपाट लेखन नहीं है कि इससे शेर का भाव आहत हो यह तो ग़मों, फ़िक्र और दुःख को बरदाश्त करने का और  विषय को बारबार दोहराने का नतीजा है जो इतना प्रभावशाली शेर काग़ज़ पर जगमगा सकें ।
नुसरत मेहदी के शेरी रवैया और शेरों को दाद देने के लिए रवायती प्रशंसा और सार्थकता का ढंग अपनाना ज़्यादती होगी। वह हमारे दौर की शाइरात में विशिष्ट ढंग की शाइरा हैं। पुरानी किसी महान शाइरा से उनकी तुलना या प्रतिस्पर्धा करना उचित नहीं। समय सब को अपने स्वर एवं चिंतन का राज़दार बनाता है। उनकी शाइरी आज के दौर में ज़िंदगी की सच्चाइयों का उद्गार है। साहित्य में न पुराना निम्न स्तरीय है न नया उच्च स्तरीय। पुराना हुस्न, भूत काल की यादगार है। आज का हुस्न वर्तमान की ज़िंदगी का करिश्मा और भविष्य  के प्रभावशाली दृष्टिकोण का इंद्रधनुषीय सपना है ।  उसके समझने के लिए वर्तमान के साहित्यिक पटल और दृश्य व परिदृश्य पर दृष्टि करनी होगी ओर इसके साथ ही क्लासिकी शाइराना रवैये पर ध्यान देना तथा अध्ययन, गहरा अध्ययन, शेरी ढाँचों को ऊष्मा, हरारत और जीवन से भरपूर कर सकता है। नुसरत बहुत चुपके से इस क्रिया से गुज़री हैं और ऐसे ताज़ा दम शेर लिखने लगी हैं जो नग़्मगी से भरपूर हैं मगर प्राचीन इशारों, उपमाओं, भंगिमाओं, तौर तरीकों से दामन झटकने के बावजूद शहरी अर्थपूर्णता के क़ाबिल हैं। यह उनकी कामयाबी है। कुछ और शेर देखें .....
इस शह्र के पेड़ों में साया नहीं मिलता
बस धूप रही मेरे हालात से वाबस्ता
अपनी बेचहरगी को देखा कर
रोज़ एक आइना न तोड़ा कर
आबे हयात पीके कई लोग मर गये
हम ज़ह्र पी के ज़िंदा हैं सुक़रात की तरह
सिर्फ अजदाद की तहज़ीब के धागे होंगे
ओढ़नी पर कोई गोटा न किनारी होगी
रेत पर जगमगा उठे तारे
आस्माँ टूट कर गिरा था क्या
सलीबो दार से उतरी तो जिस्मों जाँ से मिली
मैं एक लम्हे में सदियों की दास्ताँ से मिली 
आम बोल चाल की भाषा में शाहरा ने नई इमेजरी पेश की है। शहर के पेड़ों में साया न मिलना, धूप और माहौल की सख़्ती का सुंदर चित्रण, आभाहीन चेहरा होने पर आईना तोड़ना और आसमान टूट कर गिरने में ग़म की शिद्दत और आँसुओं  का सितारों की  तरह चमकना। क्रास और सूली से उतरने पर सदियों निर्दयता, सितम, अन्याय और हमारे समाज की चक्की में पिसती आम जनता आदि ऐसी शेरी उपमाएँ हैं, चित्रण है जिसमें स्त्रियोचित अभिव्यक्ति  में एक अजीब प्रकार की मोहब्बत और ममता  के भावों को भर दिया है जो नाराज़ तो है मगर तबाही का तलबगार नहीं। जो अप्रियता दर्शाती तो हो मगर अच्छाई के लिए प्रयत्नशील है क्योंकि उसके आँगन  में नये मौसम और नए क्षणों की सुगंध उड़ कर आ रही है ।
नुसरत मेहदी को सुन्दर और यादगार शेर कहने के लिए मुबारकबाद तो कहना ही है लेकिन अल्लाह पाक की इस देन को भी दिल से मानता हूँ उसकी यह कृपा  है, और उससे दुआ करता हूँ कि अच्छे दिल की, बेहतरीन सोच और कर्म की, ख़ूबसूरत विचारों की शाइरी को वैश्विक पैमाने पर प्रसिद्धि प्रदान करे । आमीन

                        -डॉ. बशीर बद्र

सुकवि रमेश हठीला स्‍मृति शिवना सम्‍मान की घोषणा

शिवरात्रि पर सुकव‍ि रमेश हठीला स्‍मृति शिवना सम्‍मान की घोषणा करने परंपरा पिछले वर्ष से कायम की है । सो आज उस पंरपरा का निर्वाहन करते हुए घोषित करते हैं इस वर्ष के सम्‍मानित कवि का नाम । इस वर्ष के लिये चयन समिति ने सर्व सम्‍मति से श्री तिलक राज कपूर जी का नाम सम्‍मान के लिये चयनित किया है । तो घोषित किया जाता है कि इस वर्ष का सुकवि रमेश हठीला शिवना सम्‍मान श्री तिलक राज कपूर जी को प्रदान किया जाएगा ।

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''सुकव‍ि रमेश हठीला स्‍मृति शिवना सम्‍मान''

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श्री तिलक राज कपूर जी

श्री नीरज गोस्‍वामी जी को सुकवि रमेश हठीला शिवना सम्‍मान प्रदान किये जाने के समारोह तथा मुशायरे के वीडियो ।

नीरज जी के सम्‍मान समारोह के बाद कुछ व्‍यस्‍तता और बढ़ गई । जैसा कि आपको पता है कि मेरा शहर सीहोर अपने कवि सम्‍मेलनों तथा मुशायरों के लिये प्रसिद्ध है । तो हाल ये कि 17 नवंबर को एक अखिल भारतीय कवि सम्‍मेलन हुआ, 1 दिसंबर को अखिल भारतीय मुशायरा फिर 2 दिसंबर को शिवना प्रकाशन का मुशायरा । और कल रात को फिर एक अखिल भारतीय मुशायरा उत्‍तराखंड के राज्‍यपाल महामहिम अज़ीज़ क़ुरैशी जी के सम्‍मान में आयोजित किया गया । उसमें से कल देर रात लौटा । और अब 24 को एक अखिल भारतीय कवि सम्‍मेलन है जिसमें सत्‍यनारायण सत्‍तन जी, अंजुम रहबर, विनीत चौहान, राजेंद्र राजन, आदि आदि आ रहे हैं । नवंबर से फरवरी तक सीहोर का माहौल खूब काव्‍यमय हो जाता है । फिर फरवरी के बाद धीरे धीरे गर्मियों के कारण आयोजन कम हो जाते हैं । परसों जब याद आया कि इस भागदौड़ में श्री नीरज जी के सम्‍मान के वीडियो अभी तक अपलोड नहीं हो पाये हैं तो कल मुशायरे की तैयारी के साथ साथ वो काम भी शुरू किया । और शाम तक सारे वीडियो अपलोड हो गये ।

सबसे पहले तो ये कि उस कार्यक्रम के पूरे फोटो अब वेब अल्‍बम पर उपलब्‍ध हैं । जिनको आप यहां https://picasaweb.google.com/117630823772225652986/NEERAJGOSWAMIJISAMMANANDMUSHAIRA 

पर जाकर देख सकते हैं तथा डाउनलोड भी कर सकते हैं । यहां पर पूरे फोटो उपलब्‍ध हैं । ब्‍लाग पर कुछ कम लगाये गये थे । तो पहले आप फोटो का आनंद लीजिये और उसके बाद वीडियो का ।

इस बार के मुशायरे में डार्क हार्स की तरह सुलभ जायसवाल ने अपनी ग़ज़ल पढ़ी । डार्क हार्स इसलिये कि उसके पढ़ने के अंदाज़ ने मुझे भी चौंका दिया । अंकित ने तो पढ़ने की रिदम बहुत पहले पकड़ ली है । बस ये कि श्रोताओं को शेर समझाने की आदत छोड़नी होगी । अंकित ने जोरदार पढ़ा । प्रकाश अर्श के पास भी कहने का अंदाज़ अब अच्‍छा हो गया है । अर्श ने पिछले कुछ सालों में जो प्रोग्रेस की है वो उसके प्रस्‍तुतिकरण में दिखती है ।

प्रदीप कांत को मैंने पहली बार सुना । गौतम को धन्‍यवाद एक अच्‍छे शायर को सुनवाने के लिये । और इसी प्रकार का धन्‍यवाद वीनस को डॉ बाली जैसे अच्‍छे शायर को सुनवाने के लिये । दोनों को सुन कर बहुत अच्‍छा लगा । फिर श्री नीरज गोस्‍वामी जी का सम्‍मान किया गया साथ ही सीहोर की साहित्यिक संस्‍थाओं को भी सम्‍मानित किया गया ।

ये वीडियो मंच के लूटे जाने का साक्षात प्रमाण है । सनद रहे और वकत पर काम आये  कि इन दो शायरों ने पूरा मुशायरा लूट लिया था । गौतम ने सीहोर में अपने इतने फैन बना लिये हैं कि अब तो इस कमबख्‍़त से रश्‍क होने लगा है । क्‍या खूब पढ़ा । हर कोई एक ही सवाल कर रहा है कर्नल अगली बार कब आएंगे । और यही किया नीरज जी ने । उनकी मुम्‍बइया ग़ज़लों ने मार ही डाला । श्रोता दीवाने हो गये । लोगों की फरमाइश है कि सीहोर में श्री नीरज गोस्‍वामी और गौतम राजरिशी का एकल काव्‍य पाठ हो । इनको लोग मन भर के सुनना चाहते हैं ।

श्री तिलक राज जी को भी मैंने पहली बार सुना । उनकी ग़ज़लें जैसी होती हैं वैसा ही उनका प्रस्‍तुतिकरण भी है । एक बार बीच में मां पर शेर कहते समय वे कुछ भावुक हो गये । तिलक जी ने पूरे रंग में काव्‍य पाठ किया । आदरणीया भाभीजी की उपस्थिति में ये रंग तो जमना ही था ।

भोपाल के श्री मुजफ्फर जी ने अपने ही विशेष अंदाज़ में ग़ज़लें पढ़ीं । उनके बाद मुशायरे का संचालन कर रहे डॉ आजम जो ने काव्‍य पाठ किया । आजम जी अपने शेरों से अचानक चौंका देते हैं । उसके बाद हिंदी कवि सम्‍मेलन मंचों के कवि शशिकांत यादव ने अपनी प्रस्‍तुतियां दीं । शशिकांत यादव का अपना एक अंदाज़ है ।

मुशायरे की सदारत कर रहे जनाब इक़बाल मसूद साहब का सम्‍मान किया गया तथा उसके बाद उन्‍होंने अपनी ग़ज़लों का पाठ किया । कच्‍ची है गली उनकी बारिश में न जा ऐ दिल, इस उम्र में जो फिसले मुश्किल से संभलता है जैसों शेरों को तहत के अपने ही अंदाज़ में जब उन्‍होंने पढ़ा तो श्रोता झूम उठे । सदर के काव्‍य पाठ के साथ ही मुशायरे का समापन हुआ ।

नये साल का मिसरा ए तरह तैयार हो रहा है । इस बार कुछ कठिन काम करने की योजना है । देखें कहां तक सफल होते हैं । 

‘‘हैं निगाहें बुलंदियों पे मेरी, क्या हुआ पांव गर ढलान पे है’’ नीरज गोस्वामी को शिवना प्रकाशन का ''सुकवि रमेश हठीला स्मृति शिवना सम्मान'' प्रदान किया गया

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हिंदी के सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार नीरज गोस्वामी को एक गरिमामय साहित्यिक आयोजन में शिवना प्रकाशन द्वारा स्‍थापित वर्ष 2012 का ''सुकवि रमेश हठीला स्मृति शिवना सम्मान'' प्रदान किया गया । स्थानीय ब्ल्यू बर्ड स्कूल के सभागार में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में विधायक श्री रमेश सक्सेना उपस्थित थे । अध्यक्षता नगरपालिका अध्यक्ष श्री नरेश मेवाड़ा ने की । विशिष्ट अतिथि के रूप में नागरिक बैंक अध्यक्ष कैलाश अग्रवाल, हिंदी सुप्रसिद्ध कवि शशिकांत यादव एवं उर्दू के मशहूर शायर श्री इक़बाल मसूद उपस्थित थे ।

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कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रकाश व्यास काका ने बैज लगाकर तथा सदस्यों अनिल पालीवाल, हरिओम शर्मा दाऊ, उमेश शर्मा, जयंत शाह, शैलेश तिवारी, श्रवण मावई, सुनील भालेराव, चंद्रकांत दासवानी, बब्बल गुरू  ने पुष्पगुच्छ भेंट कर  किया ।

मुम्बई के कवि नीरज गोस्वामी को सुकवि रमेश हठीला शिवना सम्मान के तहत मंगल तिलक कर एवं शाल, श्रीफल, सम्मान पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया ।

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श्री गोस्वामी का परिचय शिवना प्रकाशन के  पंकज सुबीर ने प्रस्तुत किया ।

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इस अवसर पर शिवना प्रकाशन की ओर से शहर की साहित्यिक संस्थाओं स्मृति के श्री अम्बादत्त भारतीय, बज़्मे फरोगे उर्दू अदब के तमकीन बहादुर, हिन्दू उत्सव समिति के सतीश राठौर, अंजुमने सूफियाए उर्दू अदब के अफ़ज़ाल पठान को साहित्यिक कार्यक्रमों के सफल आयोजन हेतु प्रशस्ति पत्र प्रदान किये गये ।

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कार्यक्रम के दूसरे चरण में श्री इक़बाल मसूद की अध्यक्षता में एक मुशायरे का आयोजन किया गया जियमें देश भर के शायरों ने ग़ज़लें पढ़ीं ।

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नई दिल्ली के सुलभ जायसवाल ने मुशायरे का प्रारंभ करते हुए ‘बेसहारा मुल्क लेकर चीखता रहता हूं मैं’ ग़ज़ल पढ़कर श्रोताओं की दाद बटोरी ।

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मुम्बई के अंकित सफर ने युवाओं की भावनाओं को ‘बढ़ाने दोस्ती गालों पे कुछ पिम्पल निकल आये’ के माध्यम से बखूबी व्यक्त किया ।

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नई दिल्ली के प्रकाश अर्श ने ‘मैं लम्हा हूं कि अर्सा हूं कि मुद्दत न जाने क्या हूं बीता जा रहा हूं’ सहित कई शेर पढ़े ।

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काश्मीर के कर्नल गौतम राजरिशी ने अपने शानदार अंदाज़ में ‘चांद इधर छत पर आया है थक कर नीला नीला है’ जैसी शानदार ग़ज़लें पढ़कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया ।

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इन्दौर के शायर प्रदीप कांत ने ‘थोड़े अपने हिस्से हम बाकी उनके किस्से हम’ सहित छोटी बहर पर लिखी गई अपनी कई ग़ज़लें पढ़ीं।

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भोपाल के शायर तिलक राज कपूर ने 'जब उसे कांधा दिया दिल ने कहा' के माध्‍यम से श्रोताओं की संवेदनाओं को झकझोर दिया ।

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भोपाल के  डॉ सूर्या बाली ने अपनी ग़ज़ल ‘बाज़ार ने गरीबों को मारा है इन दिनों’ पढ़कर श्रोताओं की खूब दाद बटोरी ।

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सम्मानित कवि नीरज गोस्वामी की मुम्बइया शैली की ग़ज़लों को श्रोताओं ने खूब सराहा । ‘जिसको चाहे टपका दे, रब तो है इक डान भीडू’ तथा ‘क्या हुआ पांव गर ढलान पर है’  शेरों  को श्रोताओं ने खूब पसंद किया । उन्होंने तरन्नुम में भी कुछ ग़ज़लें पढ़ीं ।

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मुशायरे का संचालन कर रहे शायर डॉ आज़म ने अपनी ग़ज़ल ‘अजब हाल में महफिलें हैं अदब की’ पढ़ी ।

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हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि शशिकांत यादव ने आपने चिरपरिचित अंदाज़ में ओज तथा देशभक्ति के गीत एवं छंद पढ़े । सैनिकों तथा राजनीतिज्ञों की तुलना करते हुए उन्होंने कविता का सस्वर पाठ किया ।

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मुशायरे की अध्यक्षता कर रहे इक़बाल मसूद ने इस अवसर पर बोलते हुए कहा कि ये नयी पीढ़ी हिन्दी और उर्दू के बीच पुल बनाने का काम कर रही है । उन्होंने सभी शायरों की ग़ज़लों को सराहा । श्री मसूद ने अपनी कई सुप्रसिद्ध ग़ज़लें पढ़ीं । ‘इस उम्र में जो फिसले मुश्किल से संभलता है’ शेर को श्रोताओं ने जमकर सराहा । देर रात तक चले इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शहर के हिंदी उर्दू के साहित्यकार, पत्रकार, एवं श्रोतागण उपस्थित थे ।

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अंत में आभार पत्रकार श्री शैलेष तिवारी ने व्यक्त किया ।

कार्यक्रम के समाचार आप यहां

http://www.pradeshtoday.com/epaper.php?ed=5&date=2012-12-04#

और यहां

http://naiduniaepaper.jagran.com/Details.aspx?id=431352&boxid=108313986

और यहां

http://www.patrika.com/news.aspx?id=947395

देख सकते हैं ।

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