महुआ घटवारिन कहानी (आधारशिला ) पर हंस में श्री भारत भारद्वाज जी का लेख और अब नया ज्ञानोदय में उसका पुर्नप्रकाशन किया गया है ।

हंस में कहानी महुआ घटवारिन पर आलोचक श्री भारत भारद्वाज जी द्वारा विस्‍तार से चर्चा की गई है । महुआ घटवारिन को आधारशिला में यहां http://adharshilapatrika.blogspot.com/2009/10/blog-post_4043.html जाकर पढ़ा जा सकता है । हंस पर जो आलेख श्री भारत भारद्वाज जी ने दिया है वो नीचे दिया जा रहा है ।

नया ज्ञानोदय की वेब साइट www.jnanpith.net पर जाकर नवम्‍बर अंक में कहानी को पढ़ा जा सकता है । 

hans

1 comments:

pran said...

SAMKAALEEN KAHANIYON MEIN PANKAJ SUBEER
KEE KAHANI " MAHUA GHATWAARIN" NISSANDHEH SHRESHTH HAI.KAHANI KEE SHRESHTHTA KE BAARE
MEIN PRASIDDH SAHITYA CHINTAK BHARAT BHARDWAJ
KEE " HANS" PATRIKA MEIN BEBAAQ TIPPANI AUR
" NAYA GYANODAYA " MEIN ISKAA PUNAA PRAKAASHAR
( AADHARSHILA KE JULY ANK MEIN PAHLE CHHAP
CHUKEE THEE) ULLEKHNIYA AUR VICHAARNIYA HAI.