रजनी नय्यर की कविताएँ इंटरनेट की उसी पहली पीढ़ी की कविताएँ हैं : डॉ. कुमार विश्‍वास

swapn marte nahin (2) इन दिनों इंटरनेट की दुनिया पर जैसे हिंदी की विस्फोट सा हो गया है । हिंदी में काफी कुछ रचा जा रहा है वहाँ पर । हालाँकि अभी ये तय होना बाकी है कि जो कुछ भी इंटरनेट पर रचा जा रहा है उस सब को साहित्य का दर्जा दिया जाये अथवा नहीं । लेकिन ये तो तय है कि इंटरनेट पर हिंदी कविता के माध्यम से एक पूरी नई पीढ़ी अपने विचार लेकर आ गई है । उन्हीं में रजनी नय्यर भी हैं । इनकी कविताओं में संवेदना है और भाव हैं, किन्तु अभी शिल्प तथा व्याकरण को लेकर बहुत कुछ किये जाने की जरूरत है । लेकिन मुझे लगता है कि कवि होने के लिये सबसे पहली आवश्यकता है कविता के साथ जुडाव होना, यदि आपका कविता के साथ जुड़ाव है तो कविता आपके बाकी के रास्ते खुद ही खोल देगी ।
रजनी नय्यर भी उस इंटरनेट साहित्य की कवयित्री हैं जो ब्लाग, आरकुट, फेसबुक और ट्वीटर जैसे कई सारे माध्यमों से फैलता जा रहा है । अब चूंकि उनकी कविताएँ पुस्तक का रूप लेकर पाठकों के हाथ में आ रही हैं इसलिये अब उनको ज्‍यादा सजग रहने की आवश्यकता है । चूँकि पुस्तक के रूप में आने का मतलब है एक बड़े पाठक वर्ग के हाथ में पहुँचना, पाठक वर्ग जो समीक्षक भी है और आलोचक भी । मैंने प्रारंभ से ही इस इंटरनेट के माध्यम से आ रहे साहित्य का समर्थन तथा उत्साहवर्ध्दन किया है । क्योंकि मुझे लगता है कि साहित्य के इस संकट काल में यह माध्यम बहुत उपयोगी हो सकता है । बात तो केवल अभिव्यक्ति की है, तो फिर इंटरनेट क्यों नहीं ? ठीक है आज इंटरनेट पर जो कवि तथा कविता है वो अपने प्रारंभिक दौर में हैं, लेकिन प्रारंभिक दौर में होना एक स्थिति है जो बीत जाती है । कल जब इंटरनेट पर हिंदी अपने प्रारंभिक दौर से गुज़र चुकी होगी तो हम देखेंगे कि इसी माध्यम से निकल कर कई सारे साहित्यकार हमारे पास होंगे । उस कल को यदि आते हुए देखना है तो हमें इसके आज का उत्साहवर्ध्दन करना ही होगा । यदि नहीं किया तो फिर हमें साहित्य को लेकर फिजूल की बातें भी नहीं करनी चाहिये ।
रजनी नय्यर की कविताएँ इंटरनेट की उसी पहली पीढ़ी की कविताएँ हैं जो अपने प्रारंभिक दौर में है । शायद कोई और रचनाकार इन कविताओं की भूमिका लिखने से पहले एक बार सोचे, लेकिन मुझे लगता है कि ज़रूरत तो इन कवियों को आज है । पौधे को पानी सींचने की ज़रूरत तब होती है जब वो अपनी प्रारंभिक अवस्था में होता है, बाद में तो विकास के सोपान पार करता हुआ वो स्वयं इतना समर्थ हो जाता है कि अपना पोषण स्वयं कर सके । इंटरनेट और कम्प्यूटर के माध्यम से सामने आई इस नई पीढी क़े पास विचार हैं, भाव हैं और अपना कहने का तरीका भी है । कई कई बार तो नये तेवर भी दिखाई देते हैं । ऐसे में ये पीढ़ी इतनी आसानी से अपने आप को ंखारिज होने देगी ऐसा नहीं लगता । हाँ एक बात जो मैंने पहले भी की वही दोहराना चाहूँगा, कि इन सारे रचनाकारों को अब व्याकरण के संतुलन की ओर भी ध्यान देना होगा ।  लेकिन जैसा कि लगता है ये नये रचनाकार भी उस चुनौती के लिये अपने को तैयार किये बैठे हैं । जैसा कि रजनी नय्यर की ही इस कविता में दिखाई देता है
चुनौती के  सागर में  डूबना  तभी सफल  और  आनंददायक  लगता है  जब  चुनौती का सागर  गहरा हो
रजनी नय्यर की कविताएँ भी अपनी चुनौती के साथ स्वयं ही जूझ लेंगीं । मैं शिवना प्रकाशन को भी अपनी ओर से साधुवाद देता हूँ जो वे इंटरनेट की इस नई पीढी क़ो पुस्तकों के माध्यम से साहित्य की असली दुनिया में लाने का काम कर रहे हैं । सीहोर जैसे सुदूर कस्बे से उच्च गुणवत्ता की ऐसी पुस्तकें प्रकाशित करना सचमुच ही एक ऐसा कार्य है जिसके लिये शिवना प्रकाशन बधाई का पात्र है । एक बार पुन: इस काव्य संग्रह ''स्वप्‍न मरते नहीं'' के लिये मेरी ओर से शुभकामनाएँ ।
dr kumar vishwas

-डॉ. कुमार विश्वास

3 comments:

Mukesh Kumar Sinha said...

Rajni jee, Viswas jee..aur shivna prakashan ko bahut bahut badhai aur shubhkamnayen..:)

Mukesh Kumar Sinha said...

Rajni jee, Viswas jee..aur shivna prakashan ko bahut bahut badhai aur shubhkamnayen..:)

Devi Nangrani said...

Rajni ji,
Bahut hi Badhayi bahut Hi Khoobsoorat Anubhutian v abhivyaktiyaan shivna ke sar ka Taj ban rahi hai
shubhkamnaoN sahit